मुझे पता था की ऐसा कुछ होने वाला था और जो चीजें देर
से होती वो पहले ही हो गई क्योंकि बुरा समय तो सबका आता है तो मेरा मानना
है की वो समय पहले ही आजाये क्योंकि पता नहीं की बाद में सहन करने की
क्षमता हो या न हो. मैं नहीं जानता की मैंने ऐसा क्या किया जिसकी
सजा मुझे भुगतनी पड़ रही है.
मैंने तुझे मेसेज किये जो बहुत कॉमन होते थे जो मैं किसी के पास भी बिना किसी डर के भेज सकता हूँ तेरी सोच ही नेगेटिव थी, मैंने तो आज तक मेसेज में तुझे i love you भी लिख कर नहीं भेजा, मैंने तुझसे कभी कोई गलत बात नहीं की, तुझसे कभी किसी भी चीज के लिए कभी force नहीं किया, मैंने खुद के teacher होने की मर्यादा हमेशा ध्यान रखी.
मेरे मन में तो तेरे लिए कभी कोई गलत ख्याल आये ही नहीं. और कभी मैंने तुझसे जो बात कही होगी तो वो भी इतनी कॉमन थी की वो मैं अपने पास पढने वाले किसी भी स्टूडेंट से कह सकता था. मेरे पास तो इतनी लड़कियां पढ़ चुकीं हैं जिनकी कोई गिनती ही नहीं है उनमें से कितनी तो जॉब कर रही है कितनी तो मेरे ही उम्र की है उनसे मुझे कोई attraction नहीं हुआ तुझसे होने का कारण तेरा भोलापन, तेरा मुझे बिना किसी डर के डांटना, तेरा शर्मना, तेरे संस्कार छोड़ ये सब तो बेकार की बातें हैं.
मैं जो भी था बिलकुल सही था लेकिन तू ही मुझे नहीं समझ पाई. मैंने बस यही तो मेसेज किया था की
"sorry, because i respect u, aur shayad ye mera last message hai." ये माफ़ी मैंने सिर्फ इसलिए मांगी थी क्योंकि मैंने तुझसे बिना पूछे ईमेल id बनाई थी. और ये सब कर के मैं भी अच्छा महसूस नहीं करता था और शायद ये मेरी तरफ से एंड ही था, मैं तो सिर्फ तुझे सरप्राइज देना चाहता था क्योंकि तू ही तो अक्सर फेसबुक और ईमेल id के बारे में पूछा करती थी. और वही हुआ जिसका मुझे सबसे ज्यादा डर था.मैंने अपनी लाइफ में पहली बार ऐसे जगह माफ़ी मांगी जहां मेरी कोई गलती ही नहीं थी.
कहने को तो मैं भी कह सकता था मैं भी इतने लड़के इकट्ठे कर सकता था की तेरी पूरी गली लड़कों से भर जाती तु गिन भी नहीं पाती क्योंकि पास्ट में बहुत बच्चों को पढाया है जो खुद गुंडे टाइप के थे और मेरी बहुत रेस्पेक्ट करते थे और मेरे एक कॉल पे आ जाते ऊपर से मेरे दोस्तों की भी कोई गिनती नहीं है. मुझे बस डर था तो मेरे माँ बाप का जिनमें से मेरे पापा तो विकलांग है और मेरी मां का दिल भी बहुत नाजुक है. और मेरे घर में हमारे लिए कोई चीज है तो वो सिर्फ इज्जत जिसे बचाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ और जो मैंने किया भी मैंने तेरे बाप से तेरे चाचा से माफ़ी मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन उन्होंने बहुत गरम दिमाग से काम लिया.
और क्योंकि मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया था तेरे माँ बाप मुझे सुनते तो शायद मैं उन्हें यकीन दिला देता मैंने जो भी किया है वो कोई अपराध नहीं है जिसके लिए तुम सब इतने aggrasive हो रहे हो. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
सच कहूं तो ये शॉक लगना भी मेरे लिए बहुत जरुरी था क्योंकि तू तो जानती ही है की मेरा सपना IAS OFFICER बनने का है और ऐसे समय में जब मुझे दिन रात अपनी पढाई करनी चाहिए उसमें मैं सिर्फ तेरे बारे में सोचता रहता था. तेरी कसम जो भी हुआ इसने मेरी लाइफ बदल के रख दी मैं तो पहले भी लड़कियों से दूर ही रहता था चाहें वो कॉलेज में हो चाहे कहीं बाहर लेकिन क्यों की मुझे अच्छी तरह से पता था की लड़कियां समय और ऊर्जा दोनों ही नष्ट करती है बस तुझसे मुझे थोडा सा ATTRACTION हो गया था जिसकी वजह से मेरे लाइफ के पुरे एक साल ख़राब हो गए.
लेकिन सच कहूँ तो अब तो तुझसे नफरत हो गई है अब तो तेरे बारे में सोचना भी मुझे IRRITATE करता है. क्योंकि ये जो भी हुआ है वो सब जहाँ तक मुझे लगता है तेरे ही किया कराया है अगर तू थोडा समझदार होती तो ऐसा कह देती की ईमेल id के लिए सॉरी बोल रहे है. और वो तेरी बात को मान भी लेते. और तेरी ईमेल आई डी 14 अक्टूबर को दिखाने की भी यही वजह थी की 15 को तेरे TUTION का महिना पूरा हो जाता और मुझे पूरी उम्मीद थी की हो सकता है की तू कल से TUTION छोड़ दे क्योंकि छोड़ना तो मैं चाहता था लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं कह सकूँ की तू कल से TUTION मत आना.
तुझसे मैंने सिर्फ इतना कहा था की जिस दिन मैं जॉब लग जाऊंगा उस दिन मैं तेरे घर पर आऊंगा , क्या ये कहना कोई गुनाह है तब तो तू 18 की भी हो जाती और तेरे घर वालों को कोई ऐतराज भी नहीं होता. शायद तू मुझसे कह देती तो मैं खुद तेरे माँ बाप से कह देता की हिमांशी मुझे पसंद है उसके बाद वो मुझे जो सजा देते मुझे वो भी मंजूर था चाहता तो मैं भी था की तेरे मांबाप को पता चल जाये की मेरे मन में तेरे लिए क्या है और पता भी चला लेकिन गलत तरीके से ऐसे उन का भी विश्वाश मुझ पर से उठ गया और समाज में जिसे पता चलेगा वो भी मुझे LOOSE करैक्टर का समझे गा लेकिन सिर्फ तू जानती है की मैं कैसा हूँ.
बस तुझसे एक REQUEST है अगर हो सके तो अपने मां बाप को यकीं दिलादियो की मैंने कभी कोई गलती नहीं की इससे फायदा तो कुछ नहीं होगा लेकिन मुझे तसल्ली हो जाएगी मैं अपनी नजरों में खुद गिर गया हूँ, अब पता नहीं क्यों मेरे मन में एक ही चीज बार बार STRIKE कर रही है की पसंद भी किया तो किससे जो 10 क्लास में है और सिर्फ 15 साल की है, और मेरे पास पढ़ती है. बराबर की होती तो मैं खुल के कह भी सकता था की हाँ मैं इससे प्यार करता हूँ लेकिन अभी कहता हूँ तो समाज मुझे गलत नजरों से देखेगा.
जो भी तेरी वजह से हुआ उसके बाद तो अब मैं तेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहता.
CONGRATULATION तू जैसा चाहती थी वैसा हो गया................bye
मैंने तुझे मेसेज किये जो बहुत कॉमन होते थे जो मैं किसी के पास भी बिना किसी डर के भेज सकता हूँ तेरी सोच ही नेगेटिव थी, मैंने तो आज तक मेसेज में तुझे i love you भी लिख कर नहीं भेजा, मैंने तुझसे कभी कोई गलत बात नहीं की, तुझसे कभी किसी भी चीज के लिए कभी force नहीं किया, मैंने खुद के teacher होने की मर्यादा हमेशा ध्यान रखी.
मेरे मन में तो तेरे लिए कभी कोई गलत ख्याल आये ही नहीं. और कभी मैंने तुझसे जो बात कही होगी तो वो भी इतनी कॉमन थी की वो मैं अपने पास पढने वाले किसी भी स्टूडेंट से कह सकता था. मेरे पास तो इतनी लड़कियां पढ़ चुकीं हैं जिनकी कोई गिनती ही नहीं है उनमें से कितनी तो जॉब कर रही है कितनी तो मेरे ही उम्र की है उनसे मुझे कोई attraction नहीं हुआ तुझसे होने का कारण तेरा भोलापन, तेरा मुझे बिना किसी डर के डांटना, तेरा शर्मना, तेरे संस्कार छोड़ ये सब तो बेकार की बातें हैं.
मैं जो भी था बिलकुल सही था लेकिन तू ही मुझे नहीं समझ पाई. मैंने बस यही तो मेसेज किया था की
"sorry, because i respect u, aur shayad ye mera last message hai." ये माफ़ी मैंने सिर्फ इसलिए मांगी थी क्योंकि मैंने तुझसे बिना पूछे ईमेल id बनाई थी. और ये सब कर के मैं भी अच्छा महसूस नहीं करता था और शायद ये मेरी तरफ से एंड ही था, मैं तो सिर्फ तुझे सरप्राइज देना चाहता था क्योंकि तू ही तो अक्सर फेसबुक और ईमेल id के बारे में पूछा करती थी. और वही हुआ जिसका मुझे सबसे ज्यादा डर था.मैंने अपनी लाइफ में पहली बार ऐसे जगह माफ़ी मांगी जहां मेरी कोई गलती ही नहीं थी.
कहने को तो मैं भी कह सकता था मैं भी इतने लड़के इकट्ठे कर सकता था की तेरी पूरी गली लड़कों से भर जाती तु गिन भी नहीं पाती क्योंकि पास्ट में बहुत बच्चों को पढाया है जो खुद गुंडे टाइप के थे और मेरी बहुत रेस्पेक्ट करते थे और मेरे एक कॉल पे आ जाते ऊपर से मेरे दोस्तों की भी कोई गिनती नहीं है. मुझे बस डर था तो मेरे माँ बाप का जिनमें से मेरे पापा तो विकलांग है और मेरी मां का दिल भी बहुत नाजुक है. और मेरे घर में हमारे लिए कोई चीज है तो वो सिर्फ इज्जत जिसे बचाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ और जो मैंने किया भी मैंने तेरे बाप से तेरे चाचा से माफ़ी मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन उन्होंने बहुत गरम दिमाग से काम लिया.
और क्योंकि मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया था तेरे माँ बाप मुझे सुनते तो शायद मैं उन्हें यकीन दिला देता मैंने जो भी किया है वो कोई अपराध नहीं है जिसके लिए तुम सब इतने aggrasive हो रहे हो. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
सच कहूं तो ये शॉक लगना भी मेरे लिए बहुत जरुरी था क्योंकि तू तो जानती ही है की मेरा सपना IAS OFFICER बनने का है और ऐसे समय में जब मुझे दिन रात अपनी पढाई करनी चाहिए उसमें मैं सिर्फ तेरे बारे में सोचता रहता था. तेरी कसम जो भी हुआ इसने मेरी लाइफ बदल के रख दी मैं तो पहले भी लड़कियों से दूर ही रहता था चाहें वो कॉलेज में हो चाहे कहीं बाहर लेकिन क्यों की मुझे अच्छी तरह से पता था की लड़कियां समय और ऊर्जा दोनों ही नष्ट करती है बस तुझसे मुझे थोडा सा ATTRACTION हो गया था जिसकी वजह से मेरे लाइफ के पुरे एक साल ख़राब हो गए.
लेकिन सच कहूँ तो अब तो तुझसे नफरत हो गई है अब तो तेरे बारे में सोचना भी मुझे IRRITATE करता है. क्योंकि ये जो भी हुआ है वो सब जहाँ तक मुझे लगता है तेरे ही किया कराया है अगर तू थोडा समझदार होती तो ऐसा कह देती की ईमेल id के लिए सॉरी बोल रहे है. और वो तेरी बात को मान भी लेते. और तेरी ईमेल आई डी 14 अक्टूबर को दिखाने की भी यही वजह थी की 15 को तेरे TUTION का महिना पूरा हो जाता और मुझे पूरी उम्मीद थी की हो सकता है की तू कल से TUTION छोड़ दे क्योंकि छोड़ना तो मैं चाहता था लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं कह सकूँ की तू कल से TUTION मत आना.
तुझसे मैंने सिर्फ इतना कहा था की जिस दिन मैं जॉब लग जाऊंगा उस दिन मैं तेरे घर पर आऊंगा , क्या ये कहना कोई गुनाह है तब तो तू 18 की भी हो जाती और तेरे घर वालों को कोई ऐतराज भी नहीं होता. शायद तू मुझसे कह देती तो मैं खुद तेरे माँ बाप से कह देता की हिमांशी मुझे पसंद है उसके बाद वो मुझे जो सजा देते मुझे वो भी मंजूर था चाहता तो मैं भी था की तेरे मांबाप को पता चल जाये की मेरे मन में तेरे लिए क्या है और पता भी चला लेकिन गलत तरीके से ऐसे उन का भी विश्वाश मुझ पर से उठ गया और समाज में जिसे पता चलेगा वो भी मुझे LOOSE करैक्टर का समझे गा लेकिन सिर्फ तू जानती है की मैं कैसा हूँ.
बस तुझसे एक REQUEST है अगर हो सके तो अपने मां बाप को यकीं दिलादियो की मैंने कभी कोई गलती नहीं की इससे फायदा तो कुछ नहीं होगा लेकिन मुझे तसल्ली हो जाएगी मैं अपनी नजरों में खुद गिर गया हूँ, अब पता नहीं क्यों मेरे मन में एक ही चीज बार बार STRIKE कर रही है की पसंद भी किया तो किससे जो 10 क्लास में है और सिर्फ 15 साल की है, और मेरे पास पढ़ती है. बराबर की होती तो मैं खुल के कह भी सकता था की हाँ मैं इससे प्यार करता हूँ लेकिन अभी कहता हूँ तो समाज मुझे गलत नजरों से देखेगा.
जो भी तेरी वजह से हुआ उसके बाद तो अब मैं तेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहता.
CONGRATULATION तू जैसा चाहती थी वैसा हो गया................bye
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